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Monday, April 6, 2020

श्रीशिवपंचाक्षरस्तोत्रम्


श्री शिवपंचाक्षरस्तोत्रम्

श्री शिवपंचाक्षरस्तोत्रम् एक स्तोत्र है।यह स्तोत्र संस्कृत साहित्य में    प्राथना काव्य रूप मे शिव जी की प्रार्थना की गई है। ॐ नम: शिवाय पर आधारित यह श्लोक संग्रह बहुत ही आकर्षक. रुप से शिवस्तुति कर रहा है।

शिव जी image


नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।
स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए शिवजी के मंत्र
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।।
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय।
सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।

shiv mantra
शिवलिंग

ध्यान
ध्याये नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं,रत्नाकलोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीति हस्तं प्रसन्नं।
पद्माशीनं समन्तात स्तुरिममरगणेव्यार्घृतिं वसानं,विश्ववाध्यं विश्ववन्द्यम निखिल भहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम॥
स्वच्छ स्वर्णपयोदं भतिकजपावर्णेभिर्मुखे: पंचभि:,त्र्यक्षरैचितिमीशमिन्दुमुकुटं सोमेश्वराख्यं प्रभुम।
शूलैटंक कृपाणवज्रदहनान-नागेन्द्रघंटाकुशान,पाशं भीतिहरं उधानममिताकल्पोज्ज्वलांग भेजे॥

ध्यान करें

वन्दे देव उमापतिं सुरुगुरु वन्दे जगत्कारणम,
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनांपतिम।
वन्दे सूर्य शशांक वहिनयनं वन्चे मुकुन्दप्रिय:,
वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवशंकरम॥
शान्तं पदमासनस्थं शशिधर मुकुटं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम,
शूलं वज्र च खडग परशुमभयदं दक्षिणागे वहन्न्तम।
नाग पाशं च घंटां डमरूकसहितं सांकुशं वामभागे,
नानालंकार दीप्तं स्फ़टिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि॥
कर्पूर गौरं करुणावतारं संसार सारं भुजगेन्द्र हारम,
सदा बसन्तं ह्रदयार विन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥

shiv mantra

नमस्कार

ऊँ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।
तव तत्वं न जानामि कीदृशोऽसि महेश्वर।
यादशोसि महादेव तादृशाय नमोनम:॥
त्रिनेत्राय नमज्ञतुभ्यं उमादेहार्धधारिणे।
त्रिशूल धारिणे तुभ्यं भूतानां पतये नम:॥
गंगाधर नमस्तुभ्यं वृषमध्वज नमोस्तु ते।
आशुतोष नमस्तुभ्यं भूयो भूयो नमो नम:॥

शिव मूल मंत्र

ॐ नमः शिवाय
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
महामृत्युञ्जय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ

रुद्र गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
इसका करें पाठ
नमामिशमीशान निर्वाण रूपं। विभुं व्यापकं ब्रम्ह्वेद स्वरूपं।।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाश माकाश वासं भजेयम।।
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं। गिराज्ञान गोतीत मीशं गिरीशं।।
करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसार पारं नतोहं।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूति कोटि प्रभा श्री शरीरं।।
स्फुरंमौली कल्लो लीनिचार गंगा। लसद्भाल बालेन्दु कंठे भुजंगा।।
चलत्कुण्डलं भू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननम नीलकंठं दयालं।।
म्रिगाधीश चर्माम्बरम मुंडमालं। प्रियम कंकरम सर्व नाथं भजामि।।
प्रचंद्म प्रकिष्ट्म प्रगल्भम परेशं। अखंडम अजम भानु कोटि प्रकाशम।।
त्रयः शूल निर्मूलनम शूलपाणीम। भजेयम भवानी पतिम भावगम्यं।।
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी। सदा सज्ज्नानंद दाता पुरारी।।
चिदानंद संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।
न यावत उमानाथ पादार विन्दम। भजंतीह लोके परे वा नाराणं।।
न तावत सुखं शान्ति संताप नाशं। प्रभो पाहि आपन्न मामीश शम्भो ।

शिव ताण्डव स्तोत्र

जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजङ्गतुङ्ग मालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम्‌ ॥१॥
जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥२॥
धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥
जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे।
मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥४॥
सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥५॥
ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिङ्गभा निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥६॥
करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज


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Shiv ji sthapana by Ram ji



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Friday, March 27, 2020

#शिव चालीसा। श्री शिव चालीसा का पथ करने से भगवान शंकर होते है प्रसन्न।

दुःख को दूर करने वाले और कष्टों को हरने वाली भगवान शिव शंकर का इसी कारण दूसरा नाम रुद्र है ।

दिनांक-27/03/2020

शिव चालीसा

दोहा!!
अज अनादि अविगत अलख, अकल अतुल अविकार।
बंदौं शिवपद युग कमल अमल अतीव उदार॥
आर्तिहरण सुखकरण शुभ भक्ति -मुक्ति -दातार।
करौ अनुग्रह दीन लखि अपनो विरद विचार॥
पर्यो पतित भव कूप महँ सहज नरक आगार।
सहज सुहृद पावन-पतित, सहजहि लेहु उबार॥
पलक-पलक आशा भर्यो, रह्यो सुबाट निहार।
ढरौ तुरन्त स्वभाववश, नेक न करौ अबार॥
जय शिव शङ्कर औघढ़दानी।
जय गिरि तनया मातु भवानी॥
सर्वोत्तम योगी योगेश्वर।
सर्वलोक ईश्वर परमेश्वर॥
सब उर प्रेरक सर्वनियन्ता।
उपद्रष्टा भर्ता अनुमन्ता॥
पराशक्ति  पति अखिल विश्वपति।
परब्रह्म परधाम परमगति॥
सर्वातीत अनन्य सर्वगत।
निजस्वरूप महिमामें स्थितरत॥
अंगभूति – भूषित श्मशानचर।
भुजंगभूषण चन्द्रमुकुटधर॥
वृषवाहन नंदीगणनायक।
अखिल विश्व के भाग्य-विधायक॥
व्याघ्रचर्म परिधान मनोहर।
रीछचर्म ओढे गिरिजावर॥
कर त्रिशूल डमरूवर राजत।
अभय वरद मुद्रा शुभ साजत॥
तनु कर्पूर-गौर उज्ज्वलतम।
पिंगल जटाजूट सिर उत्तम॥
भाल त्रिपुण्ड्र मुण्डमालाधर।
गल रुद्राक्ष-माल शोभाकर॥
विधि-हरि-रुद्र त्रिविध वपुधारी।
बने सृजन-पालन-लयकारी॥
तुम हो नित्य दया के सागर।
आशुतोष आनन्द-उजागर॥
अति दयालु भोले भण्डारी।
अग-जग सबके मंगलकारी॥
सती-पार्वती के प्राणेश्वर।
स्कन्द-गणेश-जनक शिव सुखकर॥
हरि-हर एक रूप गुणशीला।
करत स्वामि-सेवक की लीला॥
रहते दोउ पूजत पुजवावत।
पूजा-पद्धति सबन्हि सिखावत॥
मारुति बन हरि-सेवा कीन्ही।
रामेश्वर बन सेवा लीन्ही॥
जग-जित घोर हलाहल पीकर।
बने सदाशिव नीलकंठ वर॥
असुरासुर शुचि वरद शुभंकर।
असुरनिहन्ता प्रभु प्रलयंकर॥
नम: शिवाय मन्त्र जपत मिटत सब क्लेश भयंकर॥
जो नर-नारि रटत शिव-शिव नित।
तिनको शिव अति करत परमहित॥
श्रीकृष्ण तप कीन्हों भारी।
ह्वै प्रसन्न वर दियो पुरारी॥
अर्जुन संग लडे किरात बन।
दियो पाशुपत-अस्त्र मुदित मन॥
भक्तन के सब कष्ट निवारे।
दे निज भक्ति सबन्हि उद्धारे॥
शङ्खचूड जालन्धर मारे।
दैत्य असंख्य प्राण हर तारे॥
अन्धकको गणपति पद दीन्हों।
शुक्र शुक्रपथ बाहर कीन्हों॥
तेहि सजीवनि विद्या दीन्हीं।
बाणासुर गणपति-गति कीन्हीं॥
अष्टमुर्ति पंचानन चिन्मय।
द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग ज्योतिर्मय॥
भुवन चतुर्दश व्यापक रूपा।
अकथ अचिन्त्य असीम अनूपा॥
काशी मरत जंतु अवलोकी।
देत मुक्ति -पद करत अशोकी॥
भक्त भगीरथ की रुचि राखी।
जटा बसी गंगा सुर साखी॥
रुरु अगस्त्य उपमन्यु ज्ञानी।
ऋषि दधीचि आदिक विज्ञानी॥
शिवरहस्य शिवज्ञान प्रचारक।
शिवहिं परम प्रिय लोकोद्धारक॥
इनके शुभ सुमिरनतें शंकर।
देत मुदित ह्वै अति दुर्लभ वर॥
अति उदार करुणावरुणालय।
हरण दैन्य-दारिद्रय-दु:ख-भय॥
तुम्हरो भजन परम हितकारी।
विप्र शूद्र सब ही अधिकारी॥
बालक वृद्ध नारि-नर ध्यावहिं।
ते अलभ्य शिवपद को पावहिं॥
भेदशून्य तुम सबके स्वामी।
सहज सुहृद सेवक अनुगामी॥
जो जन शरण तुम्हारी आवत।
सकल दुरित तत्काल नशावत॥

|| दोहा ||
बहन करौ तुम शीलवश, निज जनकौ सब भार।
गनौ न अघ, अघ-जाति कछु, सब विधि करो सँभार॥
तुम्हरो शील स्वभाव लखि, जो न शरण तव होय।
तेहि सम कुटिल कुबुद्धि जन, नहिं कुभाग्य जन कोय॥
दीन-हीन अति मलिन मति, मैं अघ-ओघ अपार।
कृपा-अनल प्रगटौ तुरत, करो पाप सब छार॥
कृपा सुधा बरसाय पुनि, शीतल करो पवित्र।
राखो पदकमलनि सदा, हे कुपात्र के मित्र॥

।। इति श्री शिव चालीसा समाप्त ।।





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माँ अम्बे जी की आरती

Shiv ji image-pic


Другое имя для этого - причина Господа Шивы Шанкара, который устраняет страдания и побеждает страдания.

Дата -27 / 03/2020





Шива Чалиса

Доха !!

Адж анади авигат алах, акл атул авикар.

Бандун Шивпад эпохи лотоса Амаль Атив Либерал

Artiharan радует благоприятную преданность - освобождение - данные.

Каро Грейс Дин Лахи Апано Вираад Идея॥

Для тебя падшая душа, ну я простой ад.

Самопроизвольно прекрасное упавшее сердцем, спонтанное спасение lehu

Wink, я надеюсь, надеюсь, Ryo Subat Nihar.

Дхароо мгновенно от природы, не будь праведным

Джай Шива Шикар Угдардани.

Джай Гири Таная Мату Бхавани

Лучший йог Йогешвар.

Круг бога бога

Все твои мотивационные шведские.

Разрешение на тюремное заключение

Парашакти Пати Ахил Вишвапати.

Парабрах Пардхам Парамгати 4

Самый эксклюзивный из всех.

Расположенный в славе в результате

Ангабхути - кремация бхишит.

Бхуджангабхушан Чандрамукутадхар॥

Вришвахана Нандиндяк.

Вселенная Фортуна MLA

Вьягармачар Манохар.

Riccharm ОДА Girijavar.

Кар Тришул Думовер Раджат.

Абхай Варад Мудра благоприятный

Тану Карпур-Гаур Ярчайший.

Пингл джутовая голова лучше॥

Бхал Трипундра Мундмаладхар.

Гал Рудракш-Мал Шобхакар॥

Видхи-Хари-Рудра Триведи Вапудхари.

Ритм создания-воспитания бэйна

Вы океан вечной милости.

Ашутош радости подвергается

Очень добрый наивный бхандари.

Все счастливы

Пранешвар Сати-Парвати.

Сканда-Ганеш-Джанак Шива Сухкар

Хари-хар формируется как добродетель.

Каратель лила владельца-слуги॥

Где живет Пуджат Пуджават?

Метод поклонения

Марути стал Хари-севой.

Рамешвар Пан Сева Линхи

Пить Джаг-джит ужасно.

Бэйн Садашив Нилкант Вар

Asurasur Shuchi Varad талисман.

Асураниханта Прабху Пралайанкар॥

Намах: Шиваай Мантра Джапат Митат Подчинение Скорби

Самец и самка крысы, Шива и Шива.

Тинко Шива Атари Карат Парамхит

Шри Кришна тяжело медитировал.

Насколько ты счастлив?

Стать Кират сражался с Арджуном.

Дио пашупать-астра мудит мана

Все проблемы преданного были решены.

Дай свою личную преданность

Шихчуд убил Джаландхара.

Монстр многочисленных существ каждой звезды

Тьма Ганпати

Венера Венера

Техи садживани видья динхи.

Banasura Ganpati-скорость

Аштамурти Панчанан Чинмай.

Двадаш Джйотирлинг Джйотирмая॥

Бхуван Чатурдаш широкой формы.

Акат Ачинтя Асем Анупа॥

Каши Марат животное Авалоки.

Страна эмансипации

Преданный Бхагиратха интересуется Ракхи.

Джата Баси Ганга Сур Сакхи

Руру Агастья Упаманью Гьяни.

Риши Дадхичи Адиколог 4

Шиварасья Шива Гьян Прачарак.

Шивхин высший любимый фольклор

Свои благоприятные пожелания Шанкар.

Дит Мудит очень редкий жених

Очень щедрая Карунаваруналая.

Харран жалко-жалко-печаль-печаль

Бхаджан, твой лучший благотворитель.

Вип Шудра единственный офицер

Старик, мужчина и женщина Дхьявахин.

Те благочестивый Шивпад

Вы хозяин всех шансов.

Спонтанный, ровный, сердечный последователь॥

Люди, которые тебя укрывают

Точность немедленных лекарств॥




, Доха ||

Сестра Кару, ты скромна, вес твоей матери

Ганау на ага, ага-кастовая черепаха, сделай весь метод.

Напишите свою скромность, которая не является убежищем.

Техи сам кривоватый кубуддхи джана, нахи кубхагья джана койе

Дин-младший, очень грязный, я, Ог, огромен.

Открой благодать, сделай грех все время

Пожалуйста, благослови Судху Барсай Пуни, успокойся.

Медальон Рахо всегда, о друг Купатры.

.. Ити Шри Шива Чалиса заключает.



Нажмите на ссылку ниже и прочитайте.

Аарти Маа Амбе джи


Шив джи изображение

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माँ अम्बे जी की आरती। # नवरात्रि। माँ #दुर्गा की पूजा।

दुर्गा माँ अर्थात माँ अम्बे की आरती

माँ अम्बे जी की आरती



जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ओम जय अम्बे गौरी
मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
ओम जय अम्बे गौरी
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै॥
ओम जय अम्बे गौरी
के हरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
 सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
ओम जय अम्बे गौरी
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
ओम जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
 धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
ओम जय अम्बे गौरी
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥
ओम जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
 आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ओम जय अम्बे गौरी
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
ओम जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
ओम जय अम्बे गौरी
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी। मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
ओम जय अम्बे गौरी
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
ओम जय अम्बे गौरी
श्रीअम्बे जी की आरती, जो को‌ई नर गावै। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
ओम जय अम्बे गौरी, ओम जय अम्बे गौरी

Monday, March 23, 2020

प्रतिदिन 108 बार ॐ नमः शिवाय का जप करें।सही 108 बार शिव पंचाक्षरी मंत्र के बराबर फलदायी होता है।भगवान शिव होते है प्रसन्न।

Shiv ji best image

108 बार  ॐ नमः शिवाय का जप ।

Bhagwan shiv ji ko khush krne ke liye.
ॐ नमः शिवाय 5 अक्षर का यह मंत्र बहुत ही शक्तिशाली मन्त्र है जिससे भगवान शिव को स्मरण करने व मन को शांत करने में प्रयोग किया जाता है। यह मात्र एक साधारण सा मंत्र जप नही है इससे बहुत से समस्या का समाधान हो जाता है।
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108 बार शिव जी का स्मरण ओम नमः शिवाय के जप के साथ।

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लंबी आयु के लिए 108 बार ॐ नमः शिवाय का जप करें। रूद्र पंचाक्षर मन्त्र

भगवान शिव जी को खुश करने के लिए करें यह जप।


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108 बार  ॐ नमः शिवाय का जप ।
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय


Sunday, March 22, 2020

Covid-19

WHO guidelines COVID-19

Who should wear a face to avoid corona.







If you are healthy, you only have to wear touch, if you are caring for someone who has 2019-NOCV infection.

The wearer when coughing or sneezing.



How to find, use, remove, and destroy


Masks are only useful when using alcohol-containing brandswash or with soap and water should be discontinued for frequent hand-cleaning.

If you wear a mask,

 you should wear it correctly then you should know how to use it and destroy it in the right way and right place.





Before applying the mask,

 clean the hands with alcoholic rub or soap and water.

Cover the mouth and nose with the face and make sure there is no gap between your face and face.





Touching time while using; If you do, clean your hands with alcoholic hand rub or soap and water.







As soon as it is moist or idol, modify the Sak with new and do not reuse the faculty once used.





To remove a mask: remove it from the back (do not open the front of the mask); Immediately sacrifice in a closed bin; Clean hands with alcohol baked brand rub or soap and water.